भोपाल। राजधानी में मोबाइल एप के माध्यम से संचालित हो रही कैब का मनमाने तरीके से संचालन हो रहा है। शहर में चलने वाली करीब तीन हजार कैब (टैक्सी) पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रहा है। ओला, उबर व इन-ड्राइवर कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही हैं। इधर, परिवहन विभाग ने पिछले सितंबर महीने में कैब पॉलिसी जारी कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर ली है। पॉलिसी आने के साढ़े चार माह बाद भी एक भी कैब कंपनी ने शहर में कैब संचालन का लाइसेंस तक नहीं लिया है। स्थिति यह है कि कैब में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन, फर्स्ट एड बॉक्स व अग्निश्मन यंत्र की व्यवस्था नहीं हुई है। मोबाइल एप से कैब बुक करने पर जिस ड्राइवर का फोटो दिखता है, उसकी जगह कोई और ड्राइवर कैब में मौजूद रहता है। किसी के नाम पर कैब होती है और चलाता कोई और है। इससे यात्री भ्रमित रहते हैं। कई बार बिना कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस लेने वाले लोग भी कैब चलाते हैं। परिवहन विभाग ने कैब कंपनियों पर नकेल कसने के लिए सितंबर में कैब पॉलिसी जारी की। इसमें सबसे पहले संबंधित कंपनी को संबंधित आरटीओ से संचालन का लाइसेंस लेना है। आरटीओ में टैक्स भी जमा करना है।
अभी कैब कंपनियां मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु से मोबाइल एप के माध्यम से कैब का संचालन करती हैं। शहर में कंपनियों के कार्यालय नहीं होते। ऐसे में किसी कैब ड्राइवर द्वारा मनमानी करने की शिकायत नहीं हो पाती। लोग आरटीओ में शिकायत करते हैं पर सख्ती से कार्रवाई नहीं हो पाती है। जब कैब कंपनियां कैब पॉलिसी के दायरे में आएंगी तो कुछ हद तक मनमानी रुकेगी।अभी ओला, रैपिडो ने शहर में कैब का संचालन करने के आवेदन आरटीओ में दिए हैं, लेकिन लाइसेंस की फीस व दस्तावेज पूरा नहीं करने को लेकर बात नहीं बन पा रही है। इससे एक भी कंपनी को आरटीओ की तरफ से कैब संचालन का लाइसेंस जारी नहीं किया गया है।इस बारे में उप परिवहन आयुक्त (वित्त) गुणवंत सेवतकर का कहना है कि कैब कंपनियों को संचालन का लाइसेंस देने को लेकर बात चल रही है। जल्द ही कैब पॉलिसी के तहत लाइसेंस जारी किए जाएंगे। समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाकर कैब को जब्त करने की कार्रवाई की जाती है।
मोबाइल एप से मनमाने तरीके से हो रहा कैब का संचालन